Tuesday, February 28, 2017

आज बिरज में होरी रे रसिया

आज बिरज में होरी रे रसिया 
आज बिरज में होरी रे रसिया।
होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया॥

घर घर से ब्रज बनिता आई,
कोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया।
आज बिरज में

इत तें आये कुंवर कन्हाई,
उत तें आईं राधा गोरी रे रसिया।
आज बिरज में

कोई लावे चोवा कोई लावे चंदन,
कोई मले मुख रोरी रे रसिया।
आज बिरज में

उडत गुलाल लाल भये बदरा,
मारत भर भर झोरी रे रसिया
आज बिरज में

चन्द्रसखी भज बाल कृष्ण प्रभु,
चिर जीवो यह जोडी रे रसिया
आज बिरज में

आज बिरज में होरी रे रसिया।
होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया॥

कौन गावं, केकुंवर कन्हिया,
कौन गावं, राधा गोरी रे रसिया।

नन्द गावं के कुंवर कन्हिया,
बरसाने की राधा गोरी रे रसिया।

कौन वरण के कुंवर कन्हिया, 
कौन वरण राधा गोरी रे रसिया।

श्याम वरण के कुंवर कन्हिया प्यारे,
गौर वरण राधा गोरी रे रसिया।

इत ते आए कुंवर कन्हिया,
उत ते राधा गोरी रे रसिया।

कौन के हाथ कनक पिचकारी,
कौन के हाथ कमोरी रे रसिया।

कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी,
राधा के हाथ कमोरी रे रसिया।

उडत गुलाल लाल भए बादल,
मारत भर भर झोरी रे रसिया।

अबीर गुलाल के बादल छाए,
धूम मचाई रे सब मिल सखिया।

चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छवि,
चिर जीवो यह जोड़ी रे रसिया।


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